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चांदनी-बिहारपुर वनांचल क्षेत्र में बाघ की दस्तक और दहाड़ से दहशत… मिले पंजों के निशान से हुई पुष्टि

On: August 28, 2025 4:43 PM
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चांदनी-बिहारपुर वनांचल क्षेत्र में बाघ की दस्तक और दहाड़ से दहशत… मिले पंजों के निशान से हुई पुष्टि

सूरजपुर।गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान के पार्क परिक्षेत्र रेहण्य से सटे चांदनी बिहारपुर इलाके में बाघ की सक्रिय मौजूदगी की पुष्टि होते ही पूरा वनवासी क्षेत्र सहम गया है। बैजनपाठ, लुल्ह और मोहरसोप के घने जंगलों में हाल ही में ताज़ा पदचिह्न मिलने के बाद ग्रामीणों ने जंगल जाना लगभग बंद कर दिया है।चरवाहे अब मवेशियों को जंगल की ओर नहीं ले जा रहे और पहाड़ी गांवों में शाम ढलते ही सन्नाटा पसर जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि बीते कुछ दिनों से उन्हें बाघ की दहाड़ सुनाई दी है, जिससे भय और भी गहरा गया है। स्थिति यह है कि कई परिवार अपने बच्चों को स्कूल भेजने से भी कतरा रहे हैं।—पिछले हमलों की यादें अब भी ताज़ास्थानीय लोगों की दहशत बेवजह नहीं है। गौरतलब है कि वर्ष 2023 और 2024 में कुदरगढ़ वन परिक्षेत्र के कालामांजन इलाके में बाघ ने लकड़ी लेने गए तीन ग्रामीणों पर हमला किया था। उस दर्दनाक घटना में एक ग्रामीण की मौत हो गई थी जबकि दो गंभीर रूप से घायल हो गए थे। यह घटना आज भी लोगों के जेहन में ताजा है और अब बिहारपुर क्षेत्र में बाघ की हलचल ने लोगों के भय को और गहरा दिया है।

वन विभाग ने की पुष्टि, पर बरती जा रही गोपनीयता

वनपरिक्षेत्र के रेंजर मेवालाल पटेल ने पुष्टि की है कि बीते पांच दिनों से बाघ बिहारपुर इलाके में सक्रिय है। मोहरसोप जंगल से उसके ताज़ा निशान भी मिले हैं। वहीं रेंजर ललित सायं पैकरा ने बताया कि बाघ की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई जानकारियां गोपनीय रखी जाती हैं, ताकि शिकारियों तक उसकी सही लोकेशन न पहुंचे।

ग्रामीणों की सुरक्षा और आजीविका पर असर

ग्रामीण इलाकों में बाघ की मौजूदगी ने लोगों के जीवन को सीधे प्रभावित किया है।बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे,महिलाएं जंगल से लकड़ी सहित अन्य वन्य उत्पाद इकट्ठा करने से डर रही हैं,चरवाहे मवेशियों को खुले मैदान तक ले जाने से कतरा रहे हैं।विशेषज्ञ मानते हैं कि बाघ का संरक्षण जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी ग्रामीणों की सुरक्षा और उनकी आजीविका को सुरक्षित करना भी है। यदि दहशत का माहौल लंबा खिंचता है तो शिक्षा, आजीविका और सामाजिक जीवन पर गहरा असर पड़ेगा।

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